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तुम कहो मैं सुनूँ---

>> Monday, May 5, 2008




तुम कहो मैं सुनूँ
मैं कहूँ तुम सुनो
ज़िन्दगी प्यार से यूँ गुज़रती रहे


जब भी हारी थी मैं
तुमने सम्बल दिया
जब गिरे थक के तुम
मेरा आश्रय लिया
हम अधूरे बहुत
एक दूजे के बिन
दिल की बातें यूँ ही दिल समझते रहें
ज़िन्दगी प्यार से यूँ गुज़रती रहे

तुम हुए मेंहरबाँ
झोली सुःख से भरी
मैने चुन-चुन सुमन
प्रेम बगिया भरी
अब ना सोचो किसे
पीर कितनी मिली
हर घड़ी दुःख की गागर
छलकती रहे

ज़िन्दगी प्यार से------


तुम ना रोको मुझे
मैं ना टोकूँ तुम्हें
दोनो मिलकर चलें
एक दूजे के संग
दिन महकता रहे
रात ढ़लती रहे
ज़िन्दगी प्यार की
धुन पे चलती रहे--

17 comments:

Parul May 5, 2008 at 5:33 PM  

दिन महकता रहे
रात ढ़लती रहे
ज़िन्दगी प्यार की
धुन पे चलती रहे--
aameen..sundar geet hai SHOBHA ji...

राजीव रंजन प्रसाद May 5, 2008 at 5:43 PM  

तुम ना रोको मुझे
मैं ना टोकूँ तुम्हें
दोनो मिलकर चलें
एक दूजे के संग
दिन महकता रहे
रात ढ़लती रहे
ज़िन्दगी प्यार की
धुन पे चलती रहे--

वाह शोभा जी़

mamta May 5, 2008 at 5:58 PM  

एक बेहतरीन रचना के लिए आपको बधाई।

रंजू ranju May 5, 2008 at 6:01 PM  

वाह बहुत खूब शोभा जी सुद्नर कविता भाव पूर्ण है अच्छी लगी पढने में

Manish May 5, 2008 at 6:21 PM  

सहज सुंदर गीत...

rakhshanda May 5, 2008 at 6:23 PM  

तुम ना रोको मुझे
मैं ना टोकूँ तुम्हें
दोनो मिलकर चलें
एक दूजे के संग
दिन महकता रहे
रात ढ़लती रहे
ज़िन्दगी प्यार की
धुन पे चलती रहे--

कितने खूबसूरत और सादगी भरे अंदाज़ में आपने अपनी बात कही है,बहुत सुंदर

DR.ANURAG ARYA May 5, 2008 at 8:06 PM  

जब भी हारी थी मैं
तुमने सम्बल दिया
जब गिरे थक के तुम
मेरा आश्रय लिया
हम अधूरे बहुत
एक दूजे के बिन

khari baat ...

दिनेशराय द्विवेदी May 5, 2008 at 11:10 PM  

इन्तहा है मुहब्बत की। खुदा सभी को दे।

राज भाटिय़ा May 6, 2008 at 12:25 AM  

यही तो हे प्यार, एक दुजे के बिना दोनो अधुरे यही बात मे सब को कहना चहाता हु,
सच मे आप की कविता ने मेरे दिल की बात कह दी

Udan Tashtari May 6, 2008 at 6:41 AM  

बहुत उम्दा और आपकी आवाज ने तो इसे चार चाँद लगा दिये. हम तो पॉडकास्ट सुन भी आये. बधाई.

मीत May 6, 2008 at 7:04 AM  

बहुत सुंदर.

अभिषेक ओझा May 6, 2008 at 12:17 PM  

बहुत खूबसूरत

कुमार आशीष May 7, 2008 at 9:59 PM  

ज़िन्दगी प्यार की
धुन पे चलती रहे-- वाह।

मोहिन्दर कुमार May 8, 2008 at 5:06 PM  

शोभा जी,
बहुत सही लिखा है आपने...छोटी छोटी बातें ही जिन्दगी को रंगीन बना देती हैं और यही छोटी छोटी बातें जिन्दगी को नर्क भी बना सकती हैं...
जो है, जैसा है.. को स्वीकारने से सब उलझने खत्म..छोटी सी जिन्दगी है प्यार से जियो

Rajesh May 9, 2008 at 12:15 PM  

अब ना सोचो किसे
पीर कितनी मिली
हर घड़ी दुःख की गागर
छलकती रहे—
ज़िन्दगी प्यार से------
Bahot hi khoob Shobhaji, do logon mein saath jeene ke liye pyaar ke rath ke do pahiye kitne jaroori hai aur us ke liye aapas ki samajdari aur sajedari bhi utni hi jaroori hai. Aap ke sabhi lekhon me sabse achhi yah lekhini hai aisa mera maanna hai......

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav October 8, 2008 at 4:57 PM  

kund sooraj par aakar
vahee geet hai
jo sunaayaa tha gaagar
vahee geet hai
bol meethe bahut
madhur aawaaj bhee
mere kaano mein gunjit
hai ye aaj bhee
aapakee lekhanee yun hi
chalatee rahe
zindgi pyaar..........

Rajesh January 21, 2009 at 4:38 PM  

अब ना सोचो किसे
पीर कितनी मिली
हर घड़ी दुःख की गागर
छलकती रहे—
ज़िन्दगी प्यार से------
Shobhaji,
Zindagi vaise bhi sukh aur dukh ke do pahiyon per hi chalti rahti hai aur shaadi ke do pahiye hai pati aur patni. Ab donon ek doosren ke adhar stambh hain aur donon hi ek duje ko sukh aur peeda donon hi dete hai, kabhi jaan kar kabhi anjaane mein. But usi se sambhal pana yahi zindagi ka doosra naam hai.

Main hamesa hi kahta hoon ki zindagi ki sari sachhaiyan aap bade hi asaani se ekdam nirmal bhavon se vyakt kar deti hai, har koi yah nahi kar pata.

Dhanyavaad.

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