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स्वाधीनता दिवस….

>> Monday, August 18, 2008


जश्न,उत्सव
देशभक्ति गीत और भाषण
और देशभक्ति
नदारद

शहीदों को श्रद्धांजलि
ध्वजारोहण
इतिहास का गौरव गान
बड़े-बड़े वादे
बधाइयों का आदान-प्रदान
और कर्तव्यों की इति

कुछ ही देर बाद
देश को लूटने की योजनाएँ
एकता पर प्रहार
वोट की राजनीति
और कुटिल अट्टाहस

और जनता…..
नेताओं पर दोषारोपण
आरोप-प्रत्यारोप
अपने कर्तव्यों से अंजान
मेरा देश महान

19 comments:

बालकिशन August 18, 2008 at 5:54 PM  

करारी चोट की आपने.
हकीकत का आइना दिखला दिया समाज को.

कुश एक खूबसूरत ख्याल August 18, 2008 at 6:02 PM  

karara waar kiya hai aapne

अनुराग August 18, 2008 at 6:17 PM  

सच्ची बात

रंजना [रंजू भाटिया] August 18, 2008 at 6:30 PM  

सत्य वचन लिखा है जी आपने ..आजादी पर्व पर करारा व्यंग

कुमार आशीष August 18, 2008 at 6:44 PM  

फिलहाल तो ऐसा ही है..

कुमार आशीष August 18, 2008 at 6:45 PM  

फिलहाल तो ऐसा ही है..

राज भाटिय़ा August 18, 2008 at 8:10 PM  

आज तो आप ने कविता मे एक आईना दिखा दिया धन्यवाद

प्रदीप ममगाईं August 18, 2008 at 9:56 PM  

समझ नही आया कहां आपको शुक्रिया कहुं, इसलिये यहीं कह रहा हुं, धन्यवाद.

राजीव रंजन प्रसाद August 18, 2008 at 11:30 PM  

सचमुच एसे ही विरोधाभासों से हमारा राष्ट्र घिरा है..बहुत अच्छी रचना।


***राजीव रंजन प्रसाद

Udan Tashtari August 18, 2008 at 11:36 PM  

सत्य वचन!!अच्छी रचना!

seema gupta August 19, 2008 at 9:59 AM  

" oh ya very right said, good comment on the subject"

Regards

Ila's world, in and out August 19, 2008 at 1:01 PM  

ये तो यथार्थ चित्रित कर दिया आपने अपनी कविता में.इस विषय पर मैने भी अपने चिट्ठे पर इसी आशय की पोस्ट लिखी है.कुछ भी हो,ये हमारे देश की हकीकत है जिसे हम झुठला नहीं सकते.

Suresh Chandra Gupta August 19, 2008 at 1:57 PM  

अति सुंदर.

ख़ुद से पूछे सब -
राष्ट्र मंच पर कहाँ खड़े हैं?
नायक हैं या खलनायक हैं?
है गौरव भारत माता का,
या उस के दुःख का कारण हैं?

महामंत्री-तस्लीम August 19, 2008 at 4:40 PM  

स्वतंत्रता दिवस के बहाने जीवन की कटु सच्चाईयों को अपना सटीक आईना दिखाया है।

vipinkizindagi August 19, 2008 at 8:13 PM  

बहुत अच्छी रचना
उम्दा रचना

रश्मि प्रभा August 19, 2008 at 10:14 PM  

sachchi tasweer.........
bahut achhi lagi

Dr. Chandra Kumar Jain August 19, 2008 at 11:14 PM  

जश्न में खो गयी
लोकतंत्र की पहचान को
सही पहचाना आपने.....!
रचना सच्चाई का मुक़म्मल बयान है.
==============================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

प्रदीप मानोरिया August 26, 2008 at 9:12 PM  

nice thaughts congratulation plz visit my blog regularly please

Rajesh August 28, 2008 at 4:46 PM  

First of all ! aap ko HAPPY INDEPENDENCE DAY. Hamare desh ki katha-vyatha bahut hi khoob tarah se aapne bataya hai ise. Pata nahi ye neta log nayak to nahi hi hai, haan khal nayak jaroor kaha ja sakta hai inko. Shayad fir koi Veer Bhagat Sinh fir Bharat mein janm dharan karen aur aaj ke is daur ko ek dookhad itihaas bana de!

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