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हम साथ-साथ चले

>> Saturday, April 5, 2008


हम साथ-साथ चले
उमंग और उत्साह से भरे

एक ही डगर पर
आँखों में
………
एक ही स्वप्न सजाए
उत्साह से लबालब

एक ही संकल्प
और …………..
एक ही डगर
एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास
बढ़ते रहे ले हाथों में हाथ

पर……
हालात की आँधी का
एक तीव्र वेग आया
और
….
उसके सबल प्रहार से
सब तितर-बितर हो गया

आशा का सम्बल
जाने कब टूटा

विश्वास की डोरी
कमजोर
सी पड़ गई
और……….

सदा साथ चलने वाले
अलग-अलग राह पर मुड़ गए


हैरान हैं राहें
बेचैन निगाहें

हृदय है तार-तार
देखती हैं
मुड़कर
व्याकुल बार- बार

6 comments:

mahendra mishra April 5, 2008 at 5:57 PM  

बहुत सुंदर सराहनीय धन्यवाद

Udan Tashtari April 5, 2008 at 9:42 PM  

बढ़िया है.

राज भाटिय़ा April 5, 2008 at 10:21 PM  

अति सुन्दर भाव,धन्यवाद

शोभा April 6, 2008 at 10:52 AM  

आप तीनों का हृदय से धन्यवाद करती हूँ। इसी तरह से उत्साह बढ़ाते रहिए।

TV de LCD April 7, 2008 at 1:37 AM  

Hello. This post is likeable, and your blog is very interesting, congratulations :-). I will add in my blogroll =). If possible gives a last there on my blog, it is about the TV de LCD, I hope you enjoy. The address is http://tv-lcd.blogspot.com. A hug.

Rajesh April 9, 2008 at 5:46 PM  

In fact, pyar mein vishwas sabse badi cheej hoti hai aur kisi karan ya aandhi ke tivra veg se saath saath chalna na hua aur bikhar gaye, aur raahe alag alag ho gayi, sabhi vastu accepted hai per ek doosre ke prati viswas ki najuk per sabse shaktisali dor toot jaye yah ganwara nahi hota.....aur isi se hriday taar taar ho jata hai aur mann vyakul ho jata hai.

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